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Wednesday, April 22, 2009

मेरी गली से वो जब भी गुजरता होगा

मेरी गली से वो जब भी गुजरता होगा
मोड़ पे जाके कुछ देर ठहरता होगा
भूल जाना मुझको इतना आसान तो न होगा
दिल मैं कुछटूट के तो बिखरता होगा
साथ देखे थे जो उन ख्वाबों का कारवा
गुबा बनकर उसकी आँखों में उभरता होगा
कोई जब चूमता होगा उसे बांहों में लेकर
मेरा प्यार बदन में उसके सिहरता होगा
उसकी जुल्फों को मेरी उँगलियाँ दुलारती होंगी
सामने आईने के वो जब भी संवारता होगा
दर्द जब भी देता होगा ये संगदिल ज़माना
वो बेवफा इस “मन” को याद करता होगा